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रिटायर्मेंट के बाद खोला डेयरी फार्म, रोजाना होता है 250 लीटर दूध का उत्पादन | | Dairy Today

रिटायर्मेंट के बाद खोला डेयरी फार्म, रोजाना होता है 250 लीटर दूध का उत्पादन

by नवीन अग्रवाल, डेयरी टुडे नेटवर्क
गाजियाबाद, 16 सितंबर 2017,

डेयरी फार्म स्थापित करना और उसे चलाना काफी चुनौतीपूर्ण काम है और हमारी कोशिश लगातार ऐसे लोगों की कहानी सामने लाने की होती है जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बाद ना सिर्फ डेयरी फार्म खोला बल्कि उसे बाखूबी चला भी रहे हैं। दरअसल यही लोग डेयरी के सुल्तान है और डेयरी के क्षेत्र में आने वाले युवाओं और किसानों की ताकत बनते हैं।

सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद खोला डेयरी फार्म


आज डेयरी के सुल्तान में हम आपको बता रहे हैं गाजियाबाद के 65 वर्षीय डेयरी किसान बृजेंद्र सिंह यादव के बारे में। बृजेंद्र सिंह यूपी सरकार के स्वास्थ्य विभाग से फूड इंस्पेक्टर के पद से 2009 में रिटायर हुए। लेकिन सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनमें कुछ अलग करने का जज्बा था। 2014 में जब यूपी सरकार की कामधेनु डेयरी योजना लांच हुई तो बृजेंद सिंह यादव को इसमें संभावनाएं नजर आईं और फिर वो पूरी ताकत से इस डेयरी फार्म खोलने में लग गए।

मुरादनगर के गढ़ी कम्हेड़ा गांव में खोला डेयरी फार्म


बृजेंद्र सिंह यादव के पास गाजियाबाद के मुरादनगर क्षेत्र के गढ़ी कम्हेड़ा गांव में कुछ जमीन थी और उन्होंने इसी जमीन पर डेयरी फार्म स्थापित करने की ठानी और पशुपालन विभाग में कामधेनु डेयरी के लिए आवेदन कर दिया। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद उनका चयन मिनी कामधेनु डेयरी के लिए हो गया। बृजेंद्र सिंह यादव ने कुछ पैसा बैंक से लोन लिया और 25 लाख रुपये की लागत से डेयरी फार्म खोल दिया।

9 गायों से शुरू किया था फार्म आज हैं 25 गायें


बृजेंद्र सिंह यादव ने अपने फार्म फ्रेश कामधेनु डेयरी फार्म की शुरुआत 9 गायों के साथ शुरू की थी। शुरुआत में वो हिमांचल प्रदेश के कांगड़ा से जर्सी गाय लाए थे। इनके मुताबिक हिमाचल के पालनपुर वेटर्निटी साइंस कॉलेज ने ही जर्सी गाय की ब्रीड तैयार की है और वहां इसकी शुद्ध नस्ल की गाय मिलती हैं। ये सभी गाय रोजाना 15 लीटर दूध देने वाली थी। धीरे-धीरे बृजेंद्र सिंह यादव ने अपने फार्म पर गायों की संख्या बढ़ा ली और ये संख्या 50 तक पहुंच गई। फिलहाल इनके फार्म में 25 गायें है। इनमें रेड सिंधी, साहीवाल, जर्सी और एचएफ नस्ल की गाए शामिल हैं। इसके अलावा 11 बछिया भी हैं जो इन्हीं के फार्म में तैयार हुई हैं और जल्द ही वो भी दूध देने के लिए तैयार होने वाली हैं।

रोजाना होता है 250 लीटर दूध का उत्पादन


फार्म फ्रेश कामधेनु डेयरी फार्म में रोजाना 250 लीटर दूध का उत्पादन होता है। सबसे बड़ी बात ये है कि बृजेंद्र सिंह यादव खुद ही दूध की मार्केटिंग करते हैं। इनका कहना है कि असली फायदा तभी है जब दूध की मार्केटिंग खुद ही की जाए। इसके लिए इन्होंने अपने डेयरी फार्म पर 500 लीटर का बल्क मिल्क कूलर स्थापित किया और गजियाबाद शहर में एक दुकान लेकर वहां पर आउटलेट खोला और फार्म फ्रेश काउ मिल्क नाम से दूध की बिक्री शुरू की।

गाजियाबाद के कई इलाकों में है दूध की सप्लाई

बृजेंद्र सिंह यादव का फार्म फ्रेश काउ मिल्क ब्रांड काफी मशहूर है। वो अपने डेयरी फार्म के शुद्ध गाय के दूध को कांच की बोतलों में पैक कर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। इसके लिए इन्होंने पांच डिलीवरी ब्वाय भी नौकरी पर रखें हैं। गाजियाबाद के राजनगर, कविनगर, लोहिया नगर, पटेल नगर समेत कई इलाकों में फार्म फ्रेश मिल्क की काफी मांग है। अब ये अपनी सप्लाई शहर के इंदिरापुरम, वैशाली और नोएडा में बढ़ाने की भी तैयारी कर रहे हैं। फार्म फ्रेस काउ मिल्क 60 रुपये प्रति लीटर बिकता है।

दूध की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं


बृजेंद्र सिंह यादव के मुताबिक उन्होंने कभी भी दूध की क्वालिटी से समझौता नहीं किया वो खुद गायों का चार खिलाने से लेकर दूध दुहने तक की निगरानी रखते हैं। फार्म में पशुओँ की देखभाल के लिए वे डेयरी फार्म कंसल्टेंट और पशु चिकित्सक डॉ. अभिषेक डाबर की भी मदद लेते हैं। डेयरी फार्म पर दौरे के वक्त डॉ. अभिषेक डाबर ने बताया कि वो फार्म में मौजूद एक-एक गाय की सेहत का पूरा रिकॉर्ड रखते हैं। इतना ही नहीं रोजाना किस गाय ने कितना दूध दिया और कम दिया तो क्यों दिया इसका भी रिकॉर्ड रखा जाता है। हाइजीन बनाए रखने के लिए मिल्किंग मशीन से दूध दुहा जाता है। इन्होंने अपने फार्म पर इस तरह का चक्र बनाया है कि हर महीने दो गाय ग्याभिन रहती हैं। इससे इन्हें साल भर दूध की किल्लत नहीं होती और लगातार एक मात्रा में दूध उत्पादन होता है। गायों के गर्भाधान के लिए सीमन भी मुजफ्फरनगर और हरियाणा से मंगाया जाता है। फार्म पर पांच लोगों का स्टॉफ है जो पशुओं की देखभाल करता है। डॉ. अभिषेक के मुताबिक डेयरी फार्मिंग में चुनौतियां तो बहुत हैं, फिर भी यदि दूध की मार्केटिंग खुद की जाए और किसी अच्छे पशु चिकित्सक की देखरेख में पशुओँ को पाला जाए तो डेयरी फार्मिंग कहीं से भी घाटे का सौदा नहीं है।

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